इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वाद दायर होने के 18 साल बाद प्रारंभिक मुद्दे के रूप में सुनवाई की मांग करना बदनीयती हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वाद दायर होने के 18 साल बाद प्रारंभिक मुद्दे के रूप में सुनवाई की मांग करना बदनीयती हैं। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह एक वर्ष के भीतर सभी पक्षों को सुनकर मुकदमे का अंतिम निस्तारण सुनिश्चित करें। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने बस्ती निवासी पारस उर्फ रामपारस की याचिका निस्तारित कर दी।
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मामला 2006 के दीवानी मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें वसीयत को रद्द करने की मांग की गई थी। 2008 में मुद्दे तय कर दिए गए थे और वादी के साक्ष्य भी दर्ज हो चुके थे। 18 साल के बाद प्रतिवादी पारस ने 2025 में आवेदन देकर क्षेत्राधिकार और परिसीमा से जुड़े मुद्दों को पहले तय करने की मांग की। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।