मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याची के पति अहमद अली को भरण-पोषण की राशि (दो लाख, 62 हजार रुपये) न दे पाने की वजह से तीस दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बावजूद जब रखरखाव की राशि अदा नहीं की गई तो याची ने अर्जी दाखिल कर रिकवरी वारंट जारी करने की मांग की। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फिर से रिकवरी वारंट जारी करते हुए अंतरिम रखरखाव की राशि को जमा करने के लिए समय दे दिया। याची ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने इस संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश 23 जनवरी 2023 के आदेश को रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह नए सिरे से नोटिस जारी कर 15 मई 2023 तक रखरखाव राशि को भुगतान करने का आदेश करे। कोर्ट ने पहले से तय किए गए अंतरिम भत्ते आठ हजार रुपये को भी 30 अप्रैल तक देने को कहा। कोर्ट ने कहा है कि अगर पति निर्धारित अवधि में भरण-पोषण की पूरी बकाया राशि जमा करने में विफल रहता है तो न्यायिक मजिस्ट्रेट घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम की धारा 31 के तहत पति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर रखरखाव की राशि को चल या अचल संपत्ति के जरिये वसूल करेगा।