प्रबंधन ने 26 जुलाई 2016 को विज्ञापन निकालकर चयन प्रक्रिया शुरू की थी। 25 मई 2017 को चयन समिति ने विकास अलेक्जेंडर का चयन किया। गोरखपुर में उस समय आई भीषण बाढ़ के कारण चयन से संबंधित दस्तावेज विभाग को भेजने में देरी हुई। फाइल चार सितंबर 2017 को बीएसए कार्यालय पहुंचा। नियमानुसार बीएसए को चार अक्तूबर तक फैसला लेना चाहिए था पर प्रबंधन को बीएसए का आदेश सात अक्तूबर को मिला।
हालांकि, विभाग ने दावा किया कि आदेश 28 सितंबर को ही पारित कर दिया गया था। इस आदेश के जरिये लिपिक की भर्ती को इस आधार पर अमान्य घोषित किया कि चयन समिति में उनका कोई आधिकारिक प्रतिनिधि शामिल नहीं था। विज्ञापन व्यापक रूप से प्रसारित अखबारों में प्रकाशित नहीं था।
कोर्ट ने विभाग के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। माना कि विभाग ने जानबूझकर समय सीमा के बाद पिछली तारीख का आदेश दिखाने की कोशिश की, जो स्वीकार्य नहीं है। लिहाजा, कोर्ट ने लिपिक की नियुक्ति को वैध मानते हुए उसे सभी परिणामी लाभों सहित बहाल करने का आदेश दिया है।