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हाईकोर्ट : फर्रुखाबाद दरोगा हत्याकांड में मिली फांसी उम्रकैद में तब्दील, कोर्ट ने दुर्लभतम केस नहीं माना

Sat, 29 Aug 2026 05:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल पुराने फर्रुखाबाद दरोगा हत्याकांड में दोषी पप्पू उर्फ चंद्र कुमार की मौत की सजा उम्रकैद में बदल दी है। कोर्ट ने उसे 25 साल की सश्रम आजीवन कारावास की सजा बिना किसी छूट के भुगतने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल पुराने फर्रुखाबाद दरोगा हत्याकांड में दोषी पप्पू उर्फ चंद्र कुमार की मौत की सजा उम्रकैद में बदल दी है। कोर्ट ने उसे 25 साल की सश्रम आजीवन कारावास की सजा बिना किसी छूट के भुगतने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने सुनाया है।

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मामला फर्रुखाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। 29 नवंबर 2014 को पुलिस टीम एक आपराधिक मामले में पप्पू को गिरफ्तार करने पहुंची थी। आरोप है कि उसी वक्त पप्पू ने तमंचे स गोली चला दी। गोली दरोगा राजकुमार सिंह के सीने में लगी। इसके बाद मौके पर उन्होंने दम तोड़ दिया। बाद में पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर जेल भेजा।

फर्रुखाबाद की सत्र अदालत ने 30 मार्च 2015 को पप्पू को हत्या, आपराधिक धमकी और आर्म्स एक्ट की धाराओं में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन कहा कि मौत की सजा केवल दुर्लभतम में मामलों में दी जानी चाहिए। कोर्ट ने आरोपी की उम्र, कमजोर आर्थिक स्थिति, जेल में संतोषजनक आचरण और सुधार की संभावना को ध्यान में रखा। पीठ ने कहा कि घटना में एक ही गोली चली और मामला पूर्व नियोजित हत्या जैसा नहीं दिखता। इसलिए इसे दुर्लभतम श्रेणी का मामला नहीं माना जा सकता। 

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