अकेले गवाह की गवाही पर लगी मुहर
मामले में रोचक मोड़ तब आया जब मुख्य गवाहों के मुकर जाने के बावजूद अदालत ने मृतक के भाई (राम दयाल) की गवाही को अटूट माना। कोर्ट ने कहा कि यदि चश्मदीद का बयान प्राकृतिक है। पोस्टमार्टम से उसकी पुष्टि होती है तो दोषियों को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि अन्य गवाह डर या दबाव में मुकर गए हैं।
एक महीने में आत्मसमर्पण का अल्टीमेटम
अपील के दौरान मुख्य आरोपी किशन लाल और भोला नाथ की मौत हो चुकी है, जिसके बाद वीरपाल ही एकमात्र जीवित अपीलकर्ता बचा था। कोर्ट ने वीरपाल की जमानत तत्काल रद्द कर उसे एक महीने के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीलीभीत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। चेतावनी दी है कि वह सरेंडर नहीं करता तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल भेजे।