दुष्कर्म और पाॅक्सो एक्ट के दोषी को हाईकोर्ट से मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के दोषी की सजा पर रोक लगाते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही आरोपी की किशोरता (जुवेनाइलिटी) के निर्धारण के लिए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने बिलाल की ओर से दायर याचिका पर दिया। बिलाल के खिलाफ मेरठ के सरूरपुर थाने में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
बिलाल को मेरठ के विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 जनवरी 2023 को दोषी ठहराया था। सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध कर कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी पिछले तीन साल से अधिक समय से जेल में है। कोर्ट ने आदेश दिया कि बिलाल को निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहा किया जाए।
तथ्य व साक्ष्य का परीक्षण ट्रायल कोर्ट का अधिकार : हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। कहा कि मामला तथ्य और साक्ष्य के परीक्षण से जुड़ा है, जिसका निर्णय ट्रायल कोर्ट की ओर से ही किया जाना उचित है। यह आदेश न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र की एकल पीठ ने रामप्यारे चौहान व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला गोरखपुर का है। आरोप है कि याचियों ने जमीन दिलाने के नाम पर 3.47 करोड़ की धनराशि प्राप्त की। इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही संभव है, जो ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।