इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर के एक हफ्ते में ही आरोपी को भगोड़ा घोषित करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही पुलिस व राज्य सरकार सहित अन्य विपक्षियों से जवाब तलब किया है। अब 16 फरवरी को मामले की सुनवाई होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा, न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने संतोष द्विवेदी और अन्य की याचिका पर दिया है।
फतेहपुर निवासी याचियों ने असोथर थाने में हत्या का प्रयास सहित अन्य आरोपों में दर्ज मुकदमे को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीके सिंह ने दलील दी कि कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है। एक निजी व्यक्ति की शिकायत पर कथित घटना हुई है। उसने कोई तहरीर नहीं दी, फिर भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। जांच के दौरान बिना किसी ठोस आधार के हत्या के प्रयास की धाराएं बढ़ा दी गईं। 18 दिसंबर 2025 को एफआईआर दर्ज हुई और 26 दिसंबर को संतोष द्विवेदी को भगोड़ा घोषित कर दिया गया।
वहीं, सरकारी अधिवक्ता पतंजलि मिश्रा ने दलील दी कि एफआईआर में संज्ञेय अपराध का खुलासा हो रहा है। इसलिए कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। याचिकाकर्ता पहले से ही ट्रायल कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दे चुके हैं, जिसकी सुनवाई छह जनवरी को होनी है। ऐसे में एक साथ दो समानांतर कानूनी उपचार प्राप्त करना कानूनन सही नहीं है। कोर्ट ने याचियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। अदालत ने सरकारी अधिवक्ता को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।