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Magh Mela : शिविर लेने लगे आकार, अब कल्पवासियों का इंतजार, साधु-संतों के साथ बसने लगे तीर्थ पुरोहितों के टेंट

Wed, 31 Dec 2025 06:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माघ मेला क्षेत्र में अनूठे आध्यात्मिक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। संगम तीरे संत–महात्माओं के साथ तीर्थ पुरोहितों के शिविर आकार लेने लगे हैं। सभी को अब कल्पवासियों का इंतजार है।
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प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।
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माघ मेला क्षेत्र में अनूठे आध्यात्मिक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। संगम तीरे संत–महात्माओं के साथ तीर्थ पुरोहितों के शिविर आकार लेने लगे हैं। सभी को अब कल्पवासियों का इंतजार है। साथ ही मुख्य स्नान पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण का दावा है कि इस बार का माघ मेला आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष और भव्य होगा।

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माघ मेला क्षेत्र में उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज, द्वारकाशारदापीठ जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के अलावा राम मारुति धाम, साकेत धाम आश्रम (बड़ा भक्तमाल), रसिक भक्तमाल मंडल खालसा, लवकुश सेवा मंडल के शिविरों में बसावट का काम जारी है।

वहीं महामंडलेश्वर संतोषदास सतुआ बाबा के साथ स्वामी मणिराम दास जी की छावनी में महंत रामकिशोर दास महाराज के शिविर का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। अनुयायियों ने बताया कि निर्माण कार्य दो-चार दिनों में पूरा हो जाएगा। साथ ही अखिल भारतीय पंचतेरह भाई त्यागी के अंतर्गत महर्षि राजेश्वरानन्द दास तपस्वी (बुलेट बाबा) का शिविर पूर्णता की ओर है।
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अखिल भारतीय यागी भक्तमाल बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर महंत राघव दास त्यागी महाराज सहित कई प्रमुख संतों के शिविर आकार लेने लगे हैं। तांत्रिक योगी श्री रमेश जी महाराज तथा अंतरराष्ट्रीय सनातन धर्म संस्थान के शिविरों का निर्माण भी जारी है।

मेला क्षेत्र में प्रयागवाल तीर्थ पुरोहितों के शिविरों में टेंट, रावटी लगाने के साथ कहीं-कहीं अभी घेरा ही बनाया जा रहा है। कहीं बिजली कनेक्शन तो कहीं शौचालय और अन्य सुविधाओं के नहीं मिलने की बात कही जा रही है। सभी के आरोप एक जैसे ही हैं कि टेंट आपूर्ति करने वाले लापरवाही बरत रहे हैं।

कई संतों ने नल कनेक्शन और सड़क पर चकर्ड प्लेट उखड़ी होने की शिकायत मेला प्रशासन से की है। माघ मेला की तैयारियों को लेकर संगम क्षेत्र में मौजूद संतों ने कहा कि माघ मेला सनातन धर्म की जीवंत परंपरा है। आने वाले दिनों में संगम तट पर आध्यात्मिक चेतना और भी सघन होती दिखाई देगी।

संतों के शिविर ज्ञान, सेवा और साधना के केंद्र होते हैं। समय रहते निर्माण कार्य पूरा कर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था करना हमारा दायित्व है। मेला प्रशासन का ध्यान इस पर है कि कल्पवासी और हर श्रद्धालु सुरक्षा के बीच संगम स्नान करें। सभी उचित सुविधाएं मिलें। -ऋषिराज, मेला अधिकारी

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