गवाह के बयान में नहीं था आत्मविश्वास
कोर्ट ने पाया कि याची और प्रतिवादी के बीच पुरानी रंजिश थी। इस वजह से अभियुक्तों को फंसाया गया था। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए याची को दोष मुक्त कर दिया। मामला 41 वर्ष पुराना है। प्रयागराज के हंडिया थाने में जमींदार शेख मोहम्मद और याची के बीच पुरानी रंजिश थी। शेख मोहम्मद ने जमीन के विवाद में याची गुलाब सहित तीन अन्य के खिलाफ दीवानी मुकदमा किया था।
हंडिया इलाके में 41 वर्ष पूर्व हुई थी घटना
चार सितंबर 1980 को जब दीवानी मुकदमें में सुनवाई के बाद जब वह (जमींदार) घर जा रहा था। तभी, गुलाब व उसके तीन साथ (राम अवध, कृपाल, ननकू उर्फ नंदू) उसे खेत में खींच ले गए और वहां उसकी हत्या कर दी। निचली अदालत ने मामले में हत्या के अपराध में चारों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन करावास की सजा सुनाई थी।
याची गुलाब व ननकू उर्फ नंदू ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान की विश्वसनीयता में कमी पाते हुए याची गुलाब को दोषमुक्त कर दिया। जबकि, ननकू उर्फ नंदू की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। गुलाब जमानत पर जेल से बाहर था। कोर्ट ने निचली अदालत के सभी रिकॉर्ड भेजने का आदेश दिया।