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हत्यारोपियों को उम्रकैद की हाईकोर्ट ने की पुष्टि

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High court confirms life term for murderers
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हत्यारोपियों को उम्रकैद की हाईकोर्ट ने की पुष्टि
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या और लूट के जुर्म में उम्रकैद की सजा पाए छह अभियुक्तों की सजा की पुष्टि कर दी है। हालांकि कोर्ट ने अभियुक्तों पर लगाए गए डकैती के आरोप को गलत करार देते हुए रद्द कर दिया है। अभियुक्तों को सिर्फ हत्या करने का दोषी पाया गया है। अलीगढ़ के सुनील और अन्य की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति बच्चू लाल और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी ने दिया है।
अभियुक्तगणों की ओर से सेशनकोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अलीगढ़ के सिकंदरारू थाने क्षेत्र के रामगोपाल ने 12 अप्रैल 1994 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस दिन सुबह करीब सवा सात बजे जब रामगोपाल खेत से लौट रहे थे तो घर के पास पहुंचने पर देखा कि गांव के ही सुनील, बच्चू, धन्नू, अवधेश, रामदास, रामदत्त और कन्हई लाल ने उनके बेटे सतीश की गोली मार कर हत्या कर दी है। सतीश उस समय गांव के देवी मंदिर में पूजा कर रहा था। रामगोपाल के शोर मचाने पर अभियुक्तों ने दौड़ा लिया और उसके घर में घुसकर नकदी तथा जेवरात आदि लूट लिए। सेशनकोर्ट ने इस मामले में सभी अभियुक्तों को हत्या के लिए उम्रकैद तथा डकैती के अपराध में दस वर्ष कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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इस फैसले के खिलाफ दाखिल अपील में कहा गया कि सेशनकोर्ट ने सजा सुनाने में गलती की है। फैसले सुनाते समय गवाहों की विश्वसनीयता, घटना स्थल की सत्यता और अन्य कई पहलुओं पर विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने मामले के विस्तृत विचारण के बाद अभियुक्तगणों को हत्या का दोषी पाया और उनको सुनाई गई सजा को सही माना। मगर डकैती के आरोपों को संदिग्ध मानते हुए इस आरोप से सभी को बरी कर दिया है। सभी अभियुक्तगण जमानत पर जेल से बाहर हैं। कोर्ट ने सभी को सीजेएम अलीगढ़ की अदालत में सरेंडर करने तथा जेल भेजने का आदेश दिया है।
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