इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की ओर से 10 किलो चरस बरामदगी के मामले में नामजद नेपाली नागरिक 62 वर्षीय बुजुर्ग आरोपी रामपुकार आर कुर्मी की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की ओर से 10 किलो चरस बरामदगी के मामले में नामजद नेपाली नागरिक 62 वर्षीय बुजुर्ग आरोपी रामपुकार आर कुर्मी की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों में स्पष्ट अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।
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याची को कानपुर रेलवे स्टेशन से एनसीबी की टीम ने 30 दिसंबर 2025 को पकड़ा था। आरोप था कि उसके बैग से 10 किलो चरस बरामद किया गया। एनडीपीएस एक्ट में उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। याची ने इस मामले में हाईकोर्ट में जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। याची अधिवक्ता ने ने दलील दी कि याची को झूठा फंसाया गया है। बरामदगी मेमो पर दर्ज सदस्यों के अलावा एक अन्य अधिकारी की ओर से गिरफ्तारी की गई थी।
एनसीबी विभाग की ओर से जारी आदेश में उसका नाम नहीं था। आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 31 दिसंबर 2025 से जेल में बंद है। वहीं, एनसीबी के वकील ने जमानत का किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पाया कि बरामदगी और गिरफ्तारी की कागजी प्रक्रियाओं में खामियां हैं। आरोपी नेपाल का निवासी है, इसलिए अदालत ने निर्देश दिया कि उसे भारतीय निवासी रिश्तेदार की एक जमानत और दो अन्य स्थानीय मुचलकों पर रिहा किया जाए।