तय की जाए दोषी अधिकारियों की जवाबदेही
कोर्ट ने कहा कि जिला, जोन व राज्य स्तर पर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नरों/अधीक्षकों को सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की दर्ज एफआईआर की विवेचना के ब्योरे के साथ सूची तैयार करने का भी निर्देश दिया है। कहा है कि सरकारी अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष त्वरित विवेचना में विफल पुलिस अधिकारियों को कुछ समय के लिए थाना या पुलिस चौकी इंचार्ज बनने से रोका जाए।
कोर्ट ने कहा यदि आरोप साबित नहीं होता तो पुलिस कमिश्नर/अधीक्षक अपनी संतुष्टि दर्ज कर फाइनल रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने याचियों के खिलाफ विवेचना शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है। मामले में 21 अगस्त 2023 को बीडीओ सुजानगंज ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर की तीन सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज कराई।
जौनपुर के एक केस के मामले में कोर्ट ने की सुनवाई
रिपोर्ट में अधिकारियों की मिलीभगत से अमृत सरोवर निर्माण में 15 लाख 57 हजार 790 रुपये के घपले के आरोप की पुष्टि की गई। इस पर दर्ज प्राथमिकी की विवेचना में पुलिस की ओर से देरी की जा रही है। घपले में ग्राम सचिव, ग्राम प्रधान, सहायक प्रोग्राम अधिकारी, लेखाकार, रोजगार सेवक लिप्त पाए गए हैं। याचियों का कहना था कि प्रारंभिक जांच 24 घंटे में पूरी कर ली गई। साथ ही कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया गया।
कमेटी की रिपोर्ट पर एक सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं। याचियों के खिलाफ कोई केस नहीं बनता और उन्हें फंसाया गया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के हवाले से कहा कि अनुच्छेद 21 नागरिकों को स्पीडी ट्रायल का अधिकार देता है। इसमें निष्पक्ष और समयबद्ध विवेचना भी शामिल है। इसलिए सरकारी विभागों के खिलाफ आपराधिक मामलों खासतौर पर भ्रष्टाचार की नियत समय के भीतर जांच पूरी करने की गाइडलान तैयार की जाए।