कोर्ट ने मेडिकल बिल पेश न कर पाने के आधार पर इलाज का खर्च खारिज करने के अधिकरण के रवैये को अनुचित बताया। कोर्ट ने 116 दिनों के लंबे अस्पताल प्रवास और रीढ़ की हड्डी में स्टील प्लेट व स्क्रू लगाने की सर्जरी को देखते हुए 2.50 लाख का चिकित्सा खर्च स्वीकृत किया। साथ ही भविष्य की संभावनाओं के तहत 50 प्रतिशत बढ़ोतरी, अटेंडेंट शुल्क के रूप में 8.64 लाख रुपये और विवाह की संभावनाओं के नुकसान के लिए एक लाख रुपये की राशि जोड़ी गई। कोर्ट ने आदेश दिया कि संशोधित कुल राशि 28,84,000 पर याचिका दायर करने की तिथि से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। यह भुगतान वाहन स्वामी और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की ओर से 50-50 प्रतिशत के अनुपात में एक महीने के भीतर किया जाएगा।