केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने रेलवे कर्मचारी के बेटे की अनुकंपा नियुक्ति के मामले में अहम आदेश देते हुए कहा कि उसके दावे पर विचार करते समय आवेदन के समय लागू नियमों और शैक्षिक योग्यता को ध्यान में रखा जाए। नियुक्ति का दावा खारिज करने वाले रेलवे के 13 नवंबर 2018 के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति ओम प्रकाश-सप्तम की पीठ ने दिया है।
ललितपुर निवासी सावन सिंह के पिता हर चरन रेलवे में गैंगमैन के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 19 जुलाई 2009 को उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद सावन सिंह ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। रेलवे ने 13 नवंबर 2018 को उनकी नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया। याची ने इसे कैट में चुनौती दी। रेलवे के अधिवक्ता का कहना था कि सावन सिंह ने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी जबकि संबंधित पद पर भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल, आईटीआई या समकक्ष निर्धारित थी।
रेलवे ने यह भी कहा था कि उन्होंने निर्धारित पांच वर्ष की अवधि में नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया था। वहीं याची के एसडी द्विवेदी ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली जल बोर्ड बनाम निर्मला देवी मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन की तारीख पर लागू शैक्षिक योग्यता को ही ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आवेदन के बाद में बदली गई शैक्षिक योग्यता के आधार पर याची के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। कैट ने रेलवे को वर्ष 2010 में प्रस्तुत मूल आवेदन की तारीख और उसकी विषयवस्तु का सत्यापन करने तथा उस समय लागू नियमों के अनुसार दावे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।