कोरांव थाना क्षेत्र के भोगन गांव निवासी रघुनंदन की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक उनके पुत्र सुरेश शिव जियावन इंटर कॉलेज, लेड़ियारी में सहायक अध्यापक पद पर तैनात थे। सुरेश की शादी मेजा की सुषमा संग हुई थी।
कोरांव के भोगन गांव निवासी दिवंगत शिक्षक सुरेश कुमार की सेवा निधि की हेराफेरी मामले की जांच के लिए शुक्रवार को डीआईओएस पीएन सिंह की ओर से दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। मामले में कोर्ट के आदेश पर कोतवाली में डीआईओएस समेत आठ लोगों को नामजद कराया गया है।
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कोरांव थाना क्षेत्र के भोगन गांव निवासी रघुनंदन की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक उनके पुत्र सुरेश शिव जियावन इंटर कॉलेज, लेड़ियारी में सहायक अध्यापक पद पर तैनात थे। सुरेश की शादी मेजा की सुषमा संग हुई थी।
आरोप है कि शादी के बाद उनकी बहू ज्यादातर अपने मायके ही रहती थी। इसी बीच सुरेश का तबादला मंझनपुर में हो गया। दो वर्ष बाद सुरेश अपनी पत्नी सुषमा को लेकर मंझनपुर चला गया, लेकिन सुषमा का वहां भी मन नहीं लगा। इस दौरान सुरेश को सुषमा के प्रेम-प्रसंग की भनक लग गई।
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मामला बढ़ने पर संबंध खत्म होने तक की नौबत आ गई। कोरोना के समय सुरेश की मौत हो गई। उनका कहना है कि मौत से पहले सुरेश ने अपने माता-पिता को अपनी सेवा निधि के हस्तांतरण के लिए नामांकित कर दिया था।
आरोप है बेटे की मौत के बाद लिपिक और पेंशन विभाग के कर्मचारियों ने फर्जी तरीके से सुषमा को नामिनी बना दिया। फिर सुरेश के खाते से 19.64 लाख रुपये निकाल लिए गए। बेटे की जगह मृतक आश्रित कोटे से सुषमा को नौकरी भी दे दी गई। उधर, डीआईओएस पीएन सिंह ने बताया कि प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य की ओर से मृतक आश्रित की पत्नी सुषमा की पत्रावली नियुक्ति के लिए प्रेषित की गई थी, जिसे नियमानुसार नियुक्ति दी गई है।