पुलिस ने विवेचना के बाद पति के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आईटी एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कोर्ट ने समन जारी कर पति को तलब किया। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता कानूनी तौर पर उसकी विवाहित पत्नी है। अंतरंगता उसका अधिकार है। वीडियो बनाने व उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने का साक्ष्य रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। लिहाजा, आईटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा रद्द किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि पत्नी का शरीर उसकी अपनी संपत्ति है। उसके निजी जीवन से जुड़ी हर बात में उसकी सहमति जरूरी है। विवाह एक पवित्र रिश्ता है। विश्वास उसकी नींव है। खुद को पत्नी का मालिक मान कर फेसबुक पर अंतरंग वीडियो अपलोड कर वैवाहिक रिश्ते की पवित्रता को भंग नहीं किया जा सकता। पत्नी, पति से अपेक्षा करती है कि वह उसके समर्पण और भरोसे का सम्मान करे।