इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में छोटी-छोटी बातों पर आवेश में दर्ज कराए जा रहे आपराधिक मुकदमों से विवाह संस्था कमजोर पड़ रही है। बिना विचार-विमर्श के दर्ज कराई जा रही शिकायतें न केवल शिकायतकर्ता और आरोपी बल्कि उनके निकट संबंधियों के लिए भी असहनीय पीड़ा का कारण बनती हैं। सहारनपुर से संबंधित मामले की सुनवाई के दाैरान न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की पीठ ने उक्त टिप्पणी की।
विवाद की प्रकृति को देखते हुए कोर्ट ने मुकदमा रद्द करने से इन्कार करते हुए निर्देश दिया कि यदि आवेदकों की ओर से ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति को माफ करने का आवेदन दायर किया जाता है तो संबंधित अदालत आवेदकों की व्यक्तिगत उपस्थिति को माफ कर दे और उन्हें वकील के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति दे।