इस पर विपक्षी ने लीगल नोटिस भेजा था, जिसका याची ने न जवाब दिया और न ही पैसे लौटाए। इस पर विपक्षी ने जिला अदालत में वाद दाखिल किया था जिसका संज्ञान लेते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याची के खिलाफ समन जारी किया था।
याची ने समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। करीब दो वर्ष से लंबित इस मामले के पहले अधिवक्ता ने अपनी बहस पिछली तारीख पर पूरी कर ली थी, लेकिन अदालत की ओर से राहत मिलने की संभावना नजर नहीं आई तो ऐन फैसले की घड़ी में एक अन्य अधिवक्ता ने अपना वकालतनामा दाखिल कर दलील पेश करने की गुजारिश की, जिससे अदालत खफा है।
हालांकि, कोर्ट ने मामले का निस्तारण गुणदोष के आधार पर करते हुए कहा, मामला तथ्यों पर आधारित है, जिस पर विचार करने का क्षेत्राधिकार ट्रायल कोर्ट का है। इस मामले में हाईकोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।