सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट एक और ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बना। सूचना तकनीक और आधुनिकीकरण की दिशा मेें क्रांतिकारी शुरूआत हुई और पहली पेपर लेस ई-कोर्ट ने विधिवत् अपना काम शुरू कर दिया। पहले दिन सूचीबद्ध छह फ्रेश और 54 लिस्टेड मुकदमों की सुनवाई की गई। ई-कोर्ट को लेकर हाईकोर्ट के वकीलों में जबरदस्त उत्साह और कौतूहल रहा।
सोमवार 21 अगस्त को सुबह दस बजे थे। कोर्ट संख्या नौ वकीलों से भर चुकी थी। ठीक दस बजे न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र अदालत में पहुंचे और न्यायपीठ पर रखे मॉनिटर को ऑन करते हैं। सबसे पहले फ्रेश कैटेगरी के मुकदमों की सुनवाई प्रारंभ हुई। पहला केस सीपीसी सेक्शन 24 के तहत ट्रांसफर एप्लीकेशन का अलका श्रीवास्तव बनाम आनंद कुमार आजमगढ़ का लगा था। अधिवक्ता शरद शर्मा और विक्रांत पांडेय में इसमें वकील हैं। बेंच सेक्रेटरी ने भी अपने सामने रखे वाईकॉम पर मुकदमे की लिस्ट से केस कॉल की। कोर्ट ने मॉनिटर पर ही रिट पढ़कर सुनवाई प्रारंभ की। हालांकि पहला दिन होने के कारण अधिवक्ता अभी मैन्युअल तरीके से हाईकॉपी की फाइल से ही बहस कर रहे हैं। वकीलों को फिलहाल इस बात की छूट दी गई है वह हाईकॉपी फाइल से बहस कर सकते हैं। वकीलों को भी लैपटॉप या टैबलेट जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करने को कहा गया है ताकि ई-कोर्ट पूरी तरह से पेपर लेस हो जाए।
ई-कोर्ट में सबकुछ बदला नजर आया। पेशकार के सामने हमेशा रखा रहने वाला फाइलों का बंडल आज नहीं था। उसकी जगह वाईकॉम रखा था। वाईकॉम कंप्यूटर मॉनिटर की तरह का उपकरण है, जिसमें मुकदमों की लिस्ट सहित सारी सूचनाएं दर्ज रहती हैं ताकि न्यायाधीश का वह पहले की तरह सहयोग कर सकें। इसे ई-पेन के जरिए ऑपरेट किया जाता है।
सोमवार को वकीलों की सारी भीड़ कोर्ट संख्या नौ में ही नजर आ रही थी। अधिवक्ताओं में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह था। दस बजते ही पूरी कोर्ट खचाखच भर गई। कहीं तिल रखने भरने की जगह नहीं थी। सभी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनना चाहते थे। वकीलों में उत्साह, कौतूहल और गर्वानूभूति भी थी। सभी इस नई व्यवस्था को देखना, जानना चाहते थे।
ई-फाइलिंग सेंटर में भी अधिवक्ताओं की खासी भीड़ जमा थी। सभी इसकी प्रक्रिया को जानना चाहते थे। तमाम अधिवक्ताओं ने ई-फाइलिंग के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया। सेंटर के कर्मचारी और अधिकारी वकीलों को प्रक्रिया समझाने और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करने में लगे रहे। ई-फाइलिंग के लिए वकील को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होता। इस कार्य को स्वयं या सेंटर के कर्मचारियों की मदद से किया जा सकता है।
जिन अधिवक्ताओं के मुकदमे हाईकोर्ट ने स्कैन करके सॉफ्ट कॉपी में बदल दिए हैं उनको अलग से अपनी फाइल स्कैन कराने की जरूरत नहीं होगी। वह हाईकोर्ट की वेबसाइट से इसे ले सकते हैं। सोमवार को पांच वकीलों ने अपने मुकदमों को स्कैन करने के लिए सेंटर पर जमा की। अब तक 40 रुपये के ई-टिकट बिके हैं। वकीलों द्वारा फाइल याचिका में यदि कोई करेक्शन होता है तो इसकी सूचना उनको ई-मेल से दी जाएगी और उसमें सुधार करने के लिए सात दिन का समय भी दिया जाएगा।