हाईकोर्ट ने जन कार्य विभाग (पीडब्ल्यूडी) के चीफ इंजीनियर हरेंद्र नाथ पांडेय का राजनीतिक दबाव में किया गया तबादला रद्द कर दिया है। साथ ही कहा है कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों की शिकायत करने का अधिकार है, मगर उनकी शिकायत पर किसी अधिकारी को हटाने से पहले सरकार प्रारंभिक जांच और विचार करने के बाद ही कदम उठाए। हरेंद्र नाथ ने एक अक्तूबर 2016 और 27 अक्तूबर 2016 के तबादला आदेशों को चुनौती दी थी। इस पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति डीएस त्रिपाठी ने सुनवाई की।
याची का कहना था कि वह पीडब्ल्यूडी इलाहाबाद में चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। बसपा विधायक रसड़ा बलिया उमाशंकर सिंह ठेकेदारी भी करते हैं। अधिशासी अभियंता राकेश कुमार अत्री की मिलीभगत से उन्होंने घोटाला किया। अधिशासी अभियंता ने बिना काम हुए भुगतान कर दिया। शिकायत पर उन्होंने जांच की और उनकी जांच रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार ने अधिशासी अभियंता पर कार्रवाई करते हुए उनको निलंबित कर दिया।
इसी वजह से उनके खिलाफ शिकायतें की गई। कहा गया कि सत्ता पक्ष के एक राज्यसभा सांसद ने कई पत्र लिखे। कोर्ट में पत्र की प्रतियां प्रस्तुत की गई। इसके बाद एक अक्तूबर को उनको इलाहाबाद से हटाकर सिंचाई विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। उन्होंने याचिका दाखिल की। इसके लंबित रहने के दौरान ही दोबारा उनका तबादला 27 अक्तूबर को पीडब्ल्यूडी लखनऊ मुख्यालय में कर दिया गया। कोर्ट ने इस तबादले को राजनीतिक प्रभाव में किया गया तबादला करार देते हुए रद्द कर दिया है।