इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म, मारपीट, धमकी, आईटी एक्ट के मामले में दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने नीरज और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म, मारपीट, धमकी, आईटी एक्ट के मामले में दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने नीरज और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
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बरेली के इज्जतनगर थाने में आरोपी के खिलाफ एक दिसंबर 2024 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि पीड़िता विवाहित है और वह दो बच्चों की मां है। 2022 में उसकी आरोपी नीरज से जान-पहचान हुई। आरोपी ने बरेली के एक होटल में जन्मदिन के बहाने बुलाकर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो व फोटो बनाए। बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर होटल में ले जाकर कई बार दुष्कर्म किया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कथित घटनाएं 2022 और 2023 की हैं, जबकि रिपोर्ट एक दिसंबर 2024 को दर्ज कराई गई। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता शिक्षित और विवाहित है। उसने कई तिथियों पर घर और होटल में मुलाकात की बात कही है। व्हाट्सएप चैट से दोनों के बीच घनिष्ठ बातचीत परिलक्षित होती है।
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कोर्ट ने कहा कि यदि एफआईआर और बयानों की सामग्री को यथावत मान लिया जाए तो भी उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट नहीं होता कि मामला परीक्षण योग्य है। ऐसे में मुकदमे को जारी रखना विधि की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।