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हाईकोर्ट : आरक्षित वर्ग के अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थियों को चयन से नहीं रोक सकते , सरकार की सभी अपीलें खारिज

Thu, 29 Oct 2026 04:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के अंक सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से अधिक हैं, उन्हें केवल आरक्षित वर्ग का होने के आधार पर चयन से वंचित नहीं किया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के अंक सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से अधिक हैं, उन्हें केवल आरक्षित वर्ग का होने के आधार पर चयन से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती-2018 से जुड़े मामले में राज्य सरकार की सभी विशेष अपीलें खारिज कर दीं।

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कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में एकल पीठ के आदेशों को सही ठहराया। मामला पुलिस कांस्टेबल भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिन्होंने महिला, भूतपूर्व सैनिक या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित श्रेणी में आरक्षण का दावा किया था। इन अभ्यर्थियों के अंक संबंधित सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से अधिक थे, लेकिन उन्हें चयन सूची में जगह नहीं मिली थी। राज्य सरकार का तर्क था कि चयन के समय लागू हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के फैसले के अनुसार कार्रवाई की गई थी।

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के सौरभ यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। कहा कि सार्वजनिक रोजगार में चयन के दौरान मेरिट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को केवल उनकी आरक्षित श्रेणी के आधार पर सामान्य श्रेणी में चयन के अवसर से वंचित करना उचित नहीं है। कोर्ट ने देरी के आधार पर भी अभ्यर्थियों को राहत देने से इन्कार करने का राज्य सरकार का तर्क स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सफल अभ्यर्थियों को वित्तीय लाभ नियुक्ति की तारीख से ही मिलेगा। उन्हें पिछली अवधि की वरिष्ठता और मौद्रिक लाभ नहीं दिया जाएगा।

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