इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि चयन समिति की संस्तुति मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी होनी जरूरी है, अन्यथा चयन रद किया जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि चयन समिति की संस्तुति मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी होनी जरूरी है, अन्यथा चयन रद किया जा सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने बिजनौर निवासी शिक्षक भूपाल सिंह की याचिका खारिज करते हुए की।
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मामला प्रधानाध्यापक पद की भर्ती से जुड़ा था। 15 जुलाई 2016 को विज्ञापन जारी हुआ था। चयन समिति ने 29 जुलाई को याची के नाम की संस्तुति कर दी थी। इसके बाद प्रस्ताव मंजूरी के लिए बीएसए को भेजा गया। लेकिन, बीएसए ने यह कहते हुए मंजूरी देने से इन्कार कर दिया कि शासनादेश के अनुसार भर्ती प्रक्रिया 31 जुलाई 2016 तक पूरी होनी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी की मंजूरी मिलने तक नियुक्ति का अधिकार उत्पन्न नहीं होता। समयसीमा समाप्त होने के बाद चयन रद्द करना पूरी तरह वैध है।