याचिका पर अधिवक्ता ने दलील दी कि सरकार की ओर से गठित जांच आयोग का दायरा बहुत सीमित है। आयोग के जांच के दायरे में लापता लोगों का पता लगाने तथा घटना में कितने लोगों की मृत्यु हुई शामिल नहीं है। यह भी दलील दी गई कि सरकार स्नानार्थियों की संख्या की जानकारी तो शीघ्रता से देती है, लेकिन मृतकों की संख्या बताने में 18 घंटे लग गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिका मूलत: कुछ रिपोर्टों पर आधारित है, लेकिन किसी भी रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया है। याचिका में दिए गए कथनों के अलावा साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
याचिका पर तथ्य प्रस्तुत करने के लिए अधिवक्ता की ओर से समय मांगा गया। इस पर न्यायालय ने 19 फरवरी की तिथि नियत की है। विदित हो कि राज्य सरकार ने महाकुंभ में हुए हादसे की जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया है। आयोग ने लोगों को घटना के संबंध में जानकारी देने के लिए आमंत्रित भी किया है।