किसी ने आठ तो किसी ने 12 लाख में ली है दुकान
इसका असर यह हुआ कि दुकानदारों का कारोबार चौपट हो गया। मेला समाप्त होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में दुकानदारों को फायदा होना तो दूर, पूंजी लौट पाने के आसार भी नहीं लग रहे हैं। हरिद्वार से आए एक दुकानदार ने बताया कि नीलामी की प्रक्रिया में भाग लेकर उसने दो दुकानें प्राप्त की। एक आठ लाख में दूसरी बारह लाख में, लेकिन ग्राहकों की कमी से पूंजी बर्बाद हो गई है। तकरीबन नौ लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। सुरेश गुप्ता नामक दुकानदार का कहना है कि 15 लाख में दुकान लिया था, अब पूंजी बर्बाद हो गई है।
घर, मकान बेचकर उधार और कर्ज चुकाना पड़ेगा। एक अन्य दुकानदार ने बताया कि बिटिया की शादी के लिए उसने पैसा रखा था, सोचा मेले में अच्छी खासी आमदनी हो जाएगी, बिटिया की शादी धूमधाम से करूंगा, लेकिन पूंजी लौटने के आसान नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, मेलाधिकारी विजय किरण आनंद का कहना है कि मेले में सभी दुकानों का आवंटन मानक के तहत ही किया गया है।
केस एक
कपड़े के कारोबारी नरेश पाल का कहना है कि नीलामी में पांच लाख में दुकान आवंटित कराया। मेला प्रशासन ने दावा किया था कि बहुत सेल होगी, लेकिन हालात विपरीत हैं। दुकान पर सात लोग काम करते हैं। खाना-पीना मजदूरी घर से ही लग रहा है। छह लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। बिक्री कुछ नहीं हैं। इसके पीछे प्रशासन की बैरिकेडिंग मुख्य कारण है।
केस दो
कॉस्टमेटिक के दुकानदार अनंत पाठक का कहना है कि चार लाख में दुकान आवंटित कराया। प्रशासन ने जगह-जगह ऐसी बैरिकेडिंग कर दी, जिसकी वजह से ग्राहक ही मार्केट में नहीं आएं। पूरा धंधा चौपट हो गया है। मॉल नहीं बिक रहा है। सात लाख रुपये के घाटे में है। अभी तक किराया भी नहीं निकल सका है।
केस तीन
गर्म कपड़े के बिक्रेता साहिल शर्मा ने बताया कि त्रिवेणी मार्केट में दुकानों की कई बार नीलामी हुई। 120 दुकानों में नब्बे दुकानें दुकानदारों ने ले तो लिया, लेकिन बिक्री न होने की वजह से पूरा धंधा ही चौपट हो गया। साढ़े छह लाख में दुकान तो ले लिया, लेकिन अभी लाखों के घाटे में हैं। दोस्तों से बीस लाख उधार लेकर धंधा शुरू किया। कैसा लौटा पाऊंगा, यह चिंता सता रही है। मेला समाप्त होने के कगार पर हैं।