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प्रयागराज : नए अंदाज में दिखेगी गंगा की 15 वर्ष की यात्रा, बदलावों को आधुनिक तकनीक से किया जाएगा प्रदर्शित

Sun, 18 Oct 2026 03:35 PM IST
विनोद सिंह पुष्पा कुमारी, प्रयागराज

सार

गंगा नदी की 15 वर्ष की यात्रा अब राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) की गैलरी में नए अंदाज में दिखेगी। वर्ष 2011 से 2026 तक नदी में आए बदलावों को आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित किया जाएगा। 
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नासी की गंगा गैलरी और निदेशक डॉ. संतोष शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गंगा नदी की 15 वर्ष की यात्रा अब राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) की गैलरी में नए अंदाज में दिखेगी। वर्ष 2011 से 2026 तक नदी में आए बदलावों को आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें जल की गुणवत्ता, प्रदूषण की स्थिति, सहायक नदियों, अपवाह क्षेत्र और नदी का पारिस्थितिकी (रिवर इकोसिस्टम) की जानकारी होगी। इसके लिए अकादमी ने राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) को पत्र भेजा है।

गंगा की प्रमुख सहायक नदियां उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से होकर बहती हैं। कुछ नदियों का उद्गम नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों में भी होता है। गंगा की 36 सहायक नदियों में से करीब 16 सूख चुकी हैं।

गैलरी को अपडेट करने का प्रमुख उद्देश्य 15 वर्षों के दौरान नदी में आए बदलावों को एक साथ प्रस्तुत करना है। वर्ष 2011 के आंकड़ों की तुलना 2026 की स्थिति से करते हुए जल की गुणवत्ता, प्रदूषण और नदी के पर्यावरणीय स्वरूप से संबंधित जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी।

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इसमें गंगा की लंबाई, अपवाह क्षेत्र और सहायक नदियों से जुड़े आंकड़ों को भी अद्यतन करने की योजना है। इसे देखकर यह समझने में मदद मिलेगी कि गंगा के संरक्षण के प्रयासों के बीच नदी की स्थिति में क्या बदलाव आए हैं। साथ ही नदी के सामने मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों और संरक्षण की जरूरतों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझने का अवसर भी मिलेगा। 

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आधुनिक तकनीक से समझेंगे गंगा का रूप

गंगा गैलरी में नदी को ड्रोन से उसके प्रवाह क्षेत्र, आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय बदलावों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा। इससे दर्शकों को गंगा के उद्गम से लेकर उसके विस्तृत प्रवाह क्षेत्र और सहायक नदियों के महत्व को समझने में आसानी होगी। गैलरी को इस तरह विकसित किया जाएगा कि दर्शक केवल लिखित जानकारियों तक सीमित न रहें बल्कि दृश्य माध्यमों के जरिये गंगा के बदलते स्वरूप को भी समझ सकें।

वर्ष 2011 में हुआ था गंगा गैलरी का उद्घाटन

नासी में 15 अप्रैल 2011 को तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री ने गंगा गैलरी का उद्घाटन किया था। गंगा के सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक महत्व को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से स्थापित इस गैलरी की परिकल्पना में प्रो. एमजीके मेनन, प्रो. एमएस स्वामीनाथन और डॉ. मंजू शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गैलरी की अवधारणा, डिजाइन और विकास में एनसीएसएम का भी योगदान रहा।

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पर्यावरणीय पहलुओं से रूबरू होंगे लोग

नासी की गंगा गैलरी को नए सिरे से विकसित करने से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम लोगों को गंगा के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व के साथ उसके वैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा। इससे गंगा के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

गंगा गैलरी को नए सिरे से अपडेट करने का उद्देश्य लोगों को गंगा की 15 साल की यात्रा से रूबरू कराना है। इसमें जल की गुणवत्ता, प्रदूषण, सहायक नदियों और पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े नए वैज्ञानिक तथ्यों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। - डॉ. संतोष शुक्ला, निदेशक, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी

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