आधुनिक तकनीक से समझेंगे गंगा का रूप
गंगा गैलरी में नदी को ड्रोन से उसके प्रवाह क्षेत्र, आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय बदलावों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा। इससे दर्शकों को गंगा के उद्गम से लेकर उसके विस्तृत प्रवाह क्षेत्र और सहायक नदियों के महत्व को समझने में आसानी होगी। गैलरी को इस तरह विकसित किया जाएगा कि दर्शक केवल लिखित जानकारियों तक सीमित न रहें बल्कि दृश्य माध्यमों के जरिये गंगा के बदलते स्वरूप को भी समझ सकें।
वर्ष 2011 में हुआ था गंगा गैलरी का उद्घाटन
नासी में 15 अप्रैल 2011 को तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री ने गंगा गैलरी का उद्घाटन किया था। गंगा के सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक महत्व को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से स्थापित इस गैलरी की परिकल्पना में प्रो. एमजीके मेनन, प्रो. एमएस स्वामीनाथन और डॉ. मंजू शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गैलरी की अवधारणा, डिजाइन और विकास में एनसीएसएम का भी योगदान रहा।
पर्यावरणीय पहलुओं से रूबरू होंगे लोग
नासी की गंगा गैलरी को नए सिरे से विकसित करने से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम लोगों को गंगा के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व के साथ उसके वैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा। इससे गंगा के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
गंगा गैलरी को नए सिरे से अपडेट करने का उद्देश्य लोगों को गंगा की 15 साल की यात्रा से रूबरू कराना है। इसमें जल की गुणवत्ता, प्रदूषण, सहायक नदियों और पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े नए वैज्ञानिक तथ्यों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। - डॉ. संतोष शुक्ला, निदेशक, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी