हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर को पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का दिया निर्देश
उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने अवार्ड के बाद जो भी रकम आई उसे राज्य सरकार के पास जमा कर दिया, लेकिन, याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें अभी मुआवजे की रकम नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ताओं से पूछा कि एनएचएआइ कह रही है कि उसने अवार्ड के बाद रकम जमा कर दी है तो सरकार बताए कि क्या सही है और यदि सही है तो काश्तकारों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया या दिया जा रहा है।
यूपी सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे रामानंद पांडेय ने कोर्ट को बताया कि अभी काश्तकारों को मुआवजे के रूप में आवंटित की गई धनराशि का अलग-अलग ब्यौरे का रिकॉर्ड नहीं मिल सका है। इस पर कोर्ट ने अलग-अलग याचिकाकर्ताओं के मामले में रिपोर्ट मांगी है। कहा है कि किन काश्तकारों को कितना मुआवजा दिया गया है या नहीं दिया गया है। सरकार पूरा ब्यौरा 17 दिसंबर को पेश करे। मामले में मुरादाबाद, सहारनपुर सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों के काश्तकारों ने मुआवजे की रकम न मिलने को लेकर याचिका दायर की है।