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हाईकोर्ट ने पूछा : हापुड़ एसएचओ बताएं... क्यों न उन पर लगाया जाएं पचास हजार जुर्माना

Sun, 02 Jun 2024 12:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मामला हापुड़ जिले के थाना हापुड़ नगर क्षेत्र का है। बिक्री विलेख संबंधी सिविल वाद से जुड़े एक मामले में विपक्षी ने याचियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग को लेकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हापुड़ की अदालत में 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की थी।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीजेएम की अदालत से अर्जी खारिज होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने वाले थाना प्रभारी हापुड़ नगर को कारण बताओ नोटिस जारी की है। कोर्ट ने पूछा है कि अदालत के आदेश की अनदेखी के लिए क्यों न उन पर पचास हजार का जुर्माना लगाया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने ओमवीर व अन्य की ओर से हापुड़ नगर थाने में उनके खिलाफ दर्ज धोखाघड़ी और कूट रचना के मामले की एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

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मामला हापुड़ जिले के थाना हापुड़ नगर क्षेत्र का है। बिक्री विलेख संबंधी सिविल वाद से जुड़े एक मामले में विपक्षी ने याचियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग को लेकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हापुड़ की अदालत में 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की थी। लेकिन मजिस्ट्रेट की अदालत ने वह अर्जी खारिज कर दी। इसके बावजूद हापुड़ नगर थाने में याचियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। जिसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि इसी मामले में एफआईआर दर्ज करने की विपक्षी की अर्जी सीजेएम की अदालत से खारिज होने के बाद एफआईआर दर्ज किया जाना अदालत की अपेक्षा के समान है।

खफा कोर्ट ने हापुड़ नगर के थाना प्रभारी को अदालती आदेश की उपेक्षा करने पर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया हैं। कोर्ट ने याचियों के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तारीख नियत की है।

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