इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में सच्चाई नहीं है। याची को एचजेएस कैडर के न्यायिक अधिकारी के पद पर नियुक्त दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने प्रदीप कुमार की याचिका पर दिया।
न्यायालय ने कहा कि राज्य के पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जाए कि याची ने जासूसी की है। याची को बरी किए जाने से उस पर लगा कलंक मिट जाना चाहिए था। उसे अपने जीवन और करियर में आगे बढ़ने की अनुमति मिल जानी चाहिए थी।
याची प्रदीप कुमार पर 2002 में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया था। उसे 2014 में मुकदमे में बरी कर दिया गया था। इसी दौरान 2016 में यूपी उच्चतर न्यायिक सेवा (सीधी भर्ती) परीक्षा में उसका अंतिम चयन हो गया। इसके बाद भी उसे नियुक्ति पत्र देने से इन्कार कर दिया गया। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मुकदमे के दौरान कोई साक्ष्य नहीं मिला कि याची ने देश के खिलाफ कोई काम किया है। इसके अलावा उसे बरी कर दिया गया है। न्यायालय ने उसे नियुक्ति देने का आदेश दिया।