इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी कारण अपीलीय न्यायालय से मुकदमा मूल न्यायालय में वापस भेजे जाने (रिमांड करने) पर अपीलार्थी कोर्ट फीस वापस पाने का अधिकारी है। अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि कोर्ट फीस की वापसी के लिए अपीलार्थी के पक्ष में प्रमाण पत्र जारी करे, ताकि वह कलक्टर से कोर्ट फीस वापस प्राप्त कर सके।
यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने चंद्र प्रकाश मिश्रा व अन्य की ओर से दाखिल अपील पर दिया है। अपीलार्थियों ने कोर्ट फीस जमा करने में विफल रहने के आधार पर सिविल वाद खारिज किए जाने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
अपीलार्थियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि अपीलार्थियों ने सिविल वाद में पूरी कोर्ट फीस जमा की थी। वाद खारिज होने के बाद अपील की गई। अपीलीय न्यायालय ने मामले की पुन: सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट भेज दिया। ट्रायल कोर्ट ने मामले को पुनर्जीवित कर दिया। ऐसे मामले की पुन: सुनवाई के लिए फिर से कोर्ट फीस की मांग अवैधानिक है। यह भी तर्क दिया गया कि एक बार मुकदमा वापस भेज दिया गया तो गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
वहीं, प्रतिवादियों के वकील ने तर्क दिया कि धारा-13 के तहत प्रमाण पत्र केवल तभी दिया जा सकता है, जब ट्रायल कोर्ट के गलत निर्णय पर नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेजा जाता है। कोर्ट ने कोर्ट फीस अधिनियम की चर्चा करते हुए अपील स्वीकार कर ली।