मुरादाबाद की लोक अदालत ने डाक विभाग पर वर्ष 2014 में 4500 रुपये हर्जाना लगाया था। स्पीड पोस्ट से भेजा गया पासपोर्ट और डिमांड ड्राफ्ट खो जाने पर डाक विभाग की ओर से हर्जाना लगाया गया था। मुरादाबाद की स्थायी लोक अदालत ने 30 सितंबर 2014 को आदेश पारित किया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साढ़े चार हज़ार रुपये के हर्जाने के खिलाफ डाक विभाग की ओर से सात वर्षों तक मुकदमा लड़ने के मामले में केंद्रीय डाक विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस विवेक चौधरी की एकल पीठ ने डाक विभाग के सीनियर सुपरिटेंडेंट की याचिका को खारिज कर दिया है।
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मुरादाबाद की लोक अदालत ने डाक विभाग पर वर्ष 2014 में 4500 रुपये हर्जाना लगाया था। स्पीड पोस्ट से भेजा गया पासपोर्ट और डिमांड ड्राफ्ट खो जाने पर डाक विभाग की ओर से हर्जाना लगाया गया था। मुरादाबाद की स्थायी लोक अदालत ने 30 सितंबर 2014 को आदेश पारित किया था।
डाक विभाग ने पीड़ित को हर्जाना देने के बजाय लोक अदालत के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। डाक विभाग ने वर्ष 2015 में याचिका दाखिल की थी। बीते सात वर्षों से हाईकोर्ट में यह याचिका विचाराधीन थी। सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस विवेक चौधरी की सिंगल बेंच ने इस मामले में 16 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। अदालत ने न सिर्फ डाक विभाग की याचिका को खारिज कर दिया बल्कि गहरी नाराजगी भी जताई है।