इसी बीच पीड़िता के पिता की ओर से पेश वकील ने जवाबी हलफनामे के साथ पीड़िता के प्राइमरी स्कूल के शैक्षिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिए। प्रेमी जोड़े की ओर से झूठा हलफनामा दाखिल करने से खफा कोर्ट ने बाल न्याय अधिनियम की धारा 94 का हवाला देते हुए पीड़िता की आयु निर्धारण की सीएमओ द्वारा प्रेषित सीलबंद रिपोर्ट को खोलने से इन्कार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि धारा 94 के अंतर्गत आयु निर्धारण के लिए सबसे पहले शैक्षिक प्रमाण पत्रों को वरीयता दी जाएगी। पिता द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र से स्पष्ट है कि पीड़िता नाबालिग है। कोर्ट ने प्रेमी जोड़े की ओर से झूठे हलफनामे पर दाखिल याचिका खारिज करते हुए पांच हजार का जुर्माना भी लगाया है।