मामले में पीएसी में तैनात दीवान, कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल का स्थानांतरण सात मई 2022 को आर्म्स कांस्टेबुलरी में कर दिया गया था। याचियों ने इस स्थानांतरण को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचियों की ओर से तर्क दिया गया था कि आर्म्स कांस्टेबुलरी दूसरा विभाग है।
दूसरे विभाग में पीएसी जवानों का स्थानांतरण नहीं हो सकता है। उन्हें पीएसी में ही एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके अलावा स्थानांतरण किसी बोर्ड द्वारा नहीं किया गया है। इसलिए सात मई को एडिशनल सुपरिटेंडेंट पीएसी के द्वारा किया गया स्थानांतरण गलत है।
इस पर हाईकोर्ट ने स्थानांतरण के आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में सुनवाई आगे बढ़ी तो अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और स्थायी अधिवक्ता विक्रम बहादुर यादव की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि यूपी में सिविल पुलिस, आर्म्स कांस्टेबुलरी, जीआरपी, अग्निशमन पुलिस, वन रक्षक पुलिस, माउंटेन पुलिस और जल पुलिस सभी एक हैं।
उन्होंने पुलिस एक्ट की धारा दो, तीन और धारा 12 में इंस्पेक्टर जनरल की शक्ति का हवाला दिया। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई केसों का हवाला दिया। कहा कि प्रशिक्षित पीएसी कर्मियों को बेहतर प्रशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल पुलिस के साथ काम करना जरूरी है।
जनहित में इस तरह का निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने सरकारी दलीलों को स्वीकार करते हुए पीएसी जवानों की ओर से दाखिल याचिकाओं को रद्द कर दिया और उन्हें स्थानांतरित स्थान पर ज्वाइन करने का आदेश दिया।