इसी टिप्पणी को चुनौती देते हुए याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसका कहना था कि ट्रायल कोर्ट को प्रत्यर्पण का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है। खासकर तब जब उसके पास ऐसे वैध पहचान पत्र मौजूद हैं, जो उसे भारतीय नागरिक साबित करते हैं। इसलिए उसे म्यांमार भेजने की बात कानूनन गलत है।
वहीं, राज्य सरकार और भारत संघ की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने कोई बाध्यकारी आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल इतना कहा है कि यदि कानून और नियम इसकी अनुमति दें, तो सक्षम अधिकारी आगे की कार्रवाई करें।
वहीं, राज्य सरकार और भारत संघ की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने कोई बाध्यकारी आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल इतना कहा है कि यदि कानून और नियम इसकी अनुमति दें, तो सक्षम अधिकारी आगे की कार्रवाई करें।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर कहा कि उसमें कहीं भी प्रत्यर्पण के लिए स्पष्ट और अनिवार्य निर्देश नहीं दिए गए हैं। "नियमानुसार" शब्दों का प्रयोग यह दर्शाता है कि अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरणों को कानून के तहत लेना है।