कोर्ट ने कहा कि मामले में अभियोजन पक्ष ठोस सबूत प्रस्तुत करने में नाकाम रहा। जिससे कि यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ताओं ने ही हत्या की है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश त्रिपाठी की खंडपीठ ने मोहम्मद अफजल उर्फ गुड्डू व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला बुलंदशहर थाना गुलावाड़ी के अंतर्गत एक व्यक्ति की हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए याची व उसके भाई को बरी कर दिया।
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कोर्ट ने कहा कि मामले में अभियोजन पक्ष ठोस सबूत प्रस्तुत करने में नाकाम रहा। जिससे कि यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ताओं ने ही हत्या की है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश त्रिपाठी की खंडपीठ ने मोहम्मद अफजल उर्फ गुड्डू व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
मामले में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ बुलंदशहर जिले केगुलावाड़ी थाने में हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि याचिकाकर्ताओं ने सफाकत अली को गोली मारकर हत्या कर दी थी। याचिकाकर्ताओं केनाम बाद में गवाहों के बयान के आधार पर आरोपित किए।
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याचिकाकर्ताओं को गैंगेस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट में आरोपित कर दिया गया। मामले में बुलंदशहर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनवाई करते हुए गैंगेस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत बरी कर दिया लेकिन आईपीसी की धारा 302 के तहत याचिकाकर्ताओं को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता मेवा लाल शुक्ला कहा कि ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने गवाहों, सबूतों को कमजोर पाते हुए दोनों को बरी कर दिया।