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हाईकोर्ट हादसा : मौत खींच लाई, पांच-सात दिन पहले ही आई थीं दोनों वृद्धाएं

Sun, 20 Jul 2025 05:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट फ्लाईओवर के नीचे हुए हादसे में जान गंवाने वाली दोनों वृद्ध महिलाओं को मौत ही शहर खींच लाई। दरअसल दोनों पांच-सात दिन पहले ही यहां आई थीं और मजदूरी करके जीवन यापन कर रही थीं।
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हाईकोर्ट फ्लाईओवर के नीचे हादसे के बाद हंगामा करते लोग। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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हाईकोर्ट फ्लाईओवर के नीचे हुए हादसे में जान गंवाने वाली दोनों वृद्ध महिलाओं को मौत ही शहर खींच लाई। दरअसल दोनों पांच-सात दिन पहले ही यहां आई थीं और मजदूरी करके जीवन यापन कर रही थीं। हादसे की खबर पर पहुंचे उनके परिजनाें ने इस बात का खुलासा किया। पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर दोनों परिवार पैतृक गांव चले गए।

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मोर्चरी पर पहुंचने वालों में चमेला देवी का बेटा राकेश फूट-फूटकर रोता रहा। उसने बताया कि पिता पन्ना लाल का जब निधन हुआ, वह महज छह साल का था। तब से मां ने ही उसे और उसकी दो बहनों का पालन-पोषण किया। एक बहन विंध्याचल में ब्याही है जबकि बड़ी बहन बरसाती की शादी शहर में ही हुई है और उसका पति धरनास्थल के पास पान-गुटखा बेचकर जीवन यापन करता है।

बेटे ने बताया कि पांच दिन पहले वह पत्नी समेत मजदूरी करने गया था। इसी दौरान मां घर से निकल गईं। वापस आने पर वह घर पर नहीं मिलीं तो खोजबीन शुरू की। पता चला कि वह हाईकोर्ट के पास रह रही हैं।
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उधर दामाद रामभवन ने बताया कि रात 12:30 बजे के आसपास पता चला कि हाईकोर्ट के पास कार ने कुछ लोगों को रौंद दिया है। वह पहुंचा तो वहां कोई नहीं था। इसके बाद अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि हादसे में मृत महिला उसकी सास हैं। इसके बाद उसने मांडा के कनेवरा गांव स्थित घर में सूचना दी तो बेटे समेत अन्य परिजन आए।

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मायके में थी मां, बिना बताए चली गई

कौंधियारा के गौरा गांव निवासी गुलाबदेवी के बेटे सुरेश व रमेश बिंद भी गमगीन रहे। सुरेश ने बताया कि पिता अर्जुन प्रसाद का कई साल पहले निधन हो गया था। मां ने ही उन्हें पाला। करीब पांच महीने पहले मां मांडा के मानपुर स्थित अपने मायके चली गई थीं। एक हफ्ते पहले पता चला कि वह वहां से बिना बताए कहीं चली गई हैं। कुछ दिनों बाद पता चला कि वह हाईकोर्ट के पास रहती हैं।

भरा-पूरा परिवार, फिर भी मजदूरी करने को मजबूर

इस घटना का एक दुखद पहलू यह भी रहा कि हादसे में जान गंवाने वाली दोनों महिलाओं का भरा-पूरा परिवार था। इसके बावजूद वह पेट की आग बुझाने के लिए मजदूरी करने को मजबूर थीं। दोनों के बेटों से पूछा गया कि मां के बिना बताए घर से जाने के बाद खोजबीन कर उन्हें वापस लाने का प्रयास क्यों नहीं किया। इसपर वे कोई जवाब नहीं दे पाए। इतना ही कहा कि सोचा था कि कुछ दिनों में ले आएंगे। बता दें कि मृतका चमेला देवी के परिवार में बेटा व बहू तो गुलाबकली के परिवार में दो बेटे व एक बहू है।
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