मायके में थी मां, बिना बताए चली गई
कौंधियारा के गौरा गांव निवासी गुलाबदेवी के बेटे सुरेश व रमेश बिंद भी गमगीन रहे। सुरेश ने बताया कि पिता अर्जुन प्रसाद का कई साल पहले निधन हो गया था। मां ने ही उन्हें पाला। करीब पांच महीने पहले मां मांडा के मानपुर स्थित अपने मायके चली गई थीं। एक हफ्ते पहले पता चला कि वह वहां से बिना बताए कहीं चली गई हैं। कुछ दिनों बाद पता चला कि वह हाईकोर्ट के पास रहती हैं।
भरा-पूरा परिवार, फिर भी मजदूरी करने को मजबूर
इस घटना का एक दुखद पहलू यह भी रहा कि हादसे में जान गंवाने वाली दोनों महिलाओं का भरा-पूरा परिवार था। इसके बावजूद वह पेट की आग बुझाने के लिए मजदूरी करने को मजबूर थीं। दोनों के बेटों से पूछा गया कि मां के बिना बताए घर से जाने के बाद खोजबीन कर उन्हें वापस लाने का प्रयास क्यों नहीं किया। इसपर वे कोई जवाब नहीं दे पाए। इतना ही कहा कि सोचा था कि कुछ दिनों में ले आएंगे। बता दें कि मृतका चमेला देवी के परिवार में बेटा व बहू तो गुलाबकली के परिवार में दो बेटे व एक बहू है।