इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस कार्रवाई कर रही है तो उसे अवैध हिरासत में मानकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस कार्रवाई कर रही है तो उसे अवैध हिरासत में मानकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने आगरा निवासी ओमवती की ओर से दायर याचिका पर दिया।
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याचिका में ओमवती ने आरोप लगाया था कि उनका 35 वर्षीय बेटा मनीष अपनी पत्नी और उसके परिजनों की अवैध हिरासत में है। इस संबंध में राजस्थान के धौलपुर जिले के मनिया थाने में 18 फरवरी 2026 को अपहरण सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। लेकिन पुलिस मनीष का पता नहीं लगा सकी।
शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि मामला अवैध हिरासत का नहीं, बल्कि वैवाहिक विवाद का है। पत्नी की शिकायत पर 16 दिसंबर 2025 को आगरा के शमशाबाद थाने में दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। मनीष गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार है और उसकी तलाश जारी है। जांच अधिकारी ने मनीष की गिरफ्तारी के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। गैरजमानती वारंट की कार्रवाई भी हुई और जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।