इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर शेल्टर होम के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के वकील राजहंस बंसल द्वारा दाखिल लेटर पेटीशन खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याचिका बिना पर्याप्त तथ्यों का पता लगाए और बिना जरूरी कागजात के मात्र मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दाखिल की गई है। अधिवक्ता ने याचिका दाखिल करने से पूर्व तथ्यों का सत्यापन भी नहीं किया है।
कोर्ट ने कहा कि उनका यह आचरण निंदनीय है। यह आदेश जस्टिस सुनीता अग्रवाल व जस्टिस एसडी सिंह की खंडपीठ ने राजहंस बंसल की याचिका पर दिया है। याचिका खारिज कर कोर्ट ने कहा कि इस पत्र में ऐसा कोई निष्पक्ष व स्वतंत्र आरोप नहीं है, जिस कारण कोर्ट हस्तक्षेप करे। याचिका के मूल लेखक डॉ. फार्रुख खान हैं, जिनका नाम याचिका में वकील के तौर पर शामिल है पर वह कोर्ट में बहस के लिए उपस्थित नहीं हुए।
उनकी तरफ से अधिवक्ता श्वेताश्व अग्रवाल कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने कहा कि अधिवक्ता ने इस पत्र के साथ जरूरी पेपर लगाए बिना चिंता व जल्दबाजी में हाईकोर्ट को पत्र भेज दिया था। वह इसके लिए एक अन्य याचिका तैयार कर रहे हैं और उसे शीघ्र दाखिल कर दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि वकील का यह आचरण अत्यंत निंदनीय है। फिलहाल, कोर्ट ने वकील के बयान पर इस याचिका को इस स्तर पर खारिज कर कर दिया है।