भीषण गर्मी ने सब्जियों और उनकी फसलों के लिए आफत खड़ी कर दी है। गर्मी के कारण इनमें हीट स्ट्रेस जैसी समस्या उत्पन्न हो रही हैं। इस कारण हजारों किसानों की सब्जियां और फसलें सूख रही हैं।
कृषि और कृषि रक्षा विभाग ने इसके लिए पहल शुरू कर दी है। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। साथ ही सभी 23 कृषि रक्षा इकाइयों को सक्रिय कर दिया गया है। यहां किसान अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते है।
कृषि उप निदेशक पवन कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि बढ़ते तापमान और तेज गर्म हवाओं (लू) के कारण सब्जी की फसलों में हीट-स्ट्रेस की समस्या देखी जा रही हैं। तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने, मिट्टी में नमी की कमी, असंतुलित पोषण और तेज धूप के कारण टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, करेला सहित अन्य सब्जियों की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे पौधों के मुरझाने फल के छोटे होने, गुणवत्ता और स्वाद में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
हीट स्ट्रेस का प्रभाव
खेतों के आसपास का तापमान 40 डिग्री से ज्यादा हो जाने पर हीट स्ट्रेस की शुरुआत होती है। इससे पत्तियां मुरझाना शुरू हो जाती हैं और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। अत्यधिक गर्मी से पौधों में एथिलीन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है। इससे फूल झड़ने लगते हैं और फल छोटे रह जाते हैं। वहीं अधिक तापमान के कारण मिट्टी गर्म हो जाती है, जिससे पौधे पोषक तत्व और पानी का अवशोषण नहीं कर पाते हैं।
किसानों की बाइट
सोरांव निवासी भगवान दिन मौर्या का कहना है कि लू और तेज गर्मी से उनकी टमाटर की 30 फीसदी फसल झुलस गई है। तोरई और लौकी के पौधों में फूल से फल नहीं बन पा रहे हैं।
शंकरगढ़ के किसान केदार का कहना है कि तापमान 45 डिग्री पार होने के बाद खरबूजे और तरबूज की बेल भी मुरझाने लगी हैं। इसका सीधा असर उसके उत्पादन पर पड़ रहा है।
कोट
जिले में हीट स्ट्रेस से बचाव की एडवाइजरी जारी कर दी गई है। फसलों को हीट-स्ट्रेस से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करें। खेत में मल्चिंग (भूसा / प्लास्टिक मल्च आदि) का प्रयोग करें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और तापमान नियंत्रित रहे। समय पर निराई-गुड़ाई करते हुए फसल की नियमित निगरानी करते रहें।
पवन कुमार विश्वकर्मा
उपनिदेशक कृषि