दो माह से अधिक समय तक सामान्य मुकदमों के लिए बंद चल रहे जिला न्यायालय में मंगलवार को फिर से आम दिनों की तरह खुली अदालत में सुनवाई प्रारंभ की गई। परंतु इस बार नजारा काफी बदला था। पहले की तरह वकीलों और वादकारियों की भीड़ नहीं थी। धक्का मुक्की जैसी नौबत कहीं भी दिखाई नहीं दी। जो भी आया चेहरे पर मास्क लगा कर ही आया। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में अभी भी कोताही नजर आ रही है।
कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हुए लाक डाउन के कारण 23 मार्च के बाद अदालत में सामान्य मुकदमों की सुनवाई बंद हो गई थी। मंगलवार को वकीलों ने सीधे अदालत के समक्ष मुकदमों में अपना पक्ष रखा। इसके पूर्व आठ मई से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई हो रही थी। मंगलवार को जिला न्यायालय में अधिवक्ता और वादकारियों के आने से चहल पहल तो दिखाई दी इसके बावजूद पहले जैसी स्थिति नहीं थी। जो लोग चेहरे पर मास्क नहीं लगाए थे उनको वकील ही टोंक दे रहे थे। कुछ अदालतों के बाहर भीड़ लग जाने से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हुआ मगर अदालतों के भीतर पूरा ऐहतियात बरता जा रहा था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला न्यायालय में जिला जज की कोर्ट सहित 21 अदालतों में 22 मई से न्यायिक कार्य शुरू करने का आदेश हुआ था। मगर उस दिन रमजान का अंतिम शुक्रवार होने के कारण वकीलों ने हड़ताल घोषित कर दी थी जिससे न्यायिक कार्य नहीं हो सका था। तीन दिन के अवकाश के बाद मंगलवार को जिला न्यायालय में फौजदारी के साथ ही दीवानी मामलों की कुछ अदालतों में भी मुकदमों की सुनवाई की गई ।