देशव्यापी लॉकडाउन के कारण जरूरतमंद वकीलों व मुंशियों की आर्थिक सहायता देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को ट्रस्टी कमेटी ने वापस लेने की मांग की है। कमेटी की अर्जी पर हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को अपनी आपत्ति तीन जून तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अर्चना सिंह ने महाधिवक्ता की उपस्थिति न होने के कारण सुनवाई टालने की प्रार्थना की।
कोर्ट ने उप्र बार कौंसिल को ट्रस्टी कमेटी की अर्जी पर आपत्ति तीन जून को ट्रस्टी कमेटी के साथ अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल को देने का निर्देश दिया है ताकि वीडियो कांफ्रेंसिंग से चार जून को मामले की सुनवाई की जा सके। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने जरूरतमंद वकीलों व मुंशियों की आर्थिक सहायता देने के लिए कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
मालूम हो कि हाईकोर्ट ने ट्रस्टी कमेटी को एक सप्ताह में वकीलों की आर्थिक सहायता देने के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यदि ट्रस्टी कमेटी के पास धन नहीं है तो वह बैंक से लोन ले और सरकार उसकी गारंटर बने। ट्रस्टी कमेटी ने इस आदेश को वापस लेने की अर्जी दी है जिस पर चार जून को सुनवाई होगी।
वकीलों को मदद देने के मामले में बार कौंसिल ने पहले ही धन नहीं होने की बात कहते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए थे। बार एसोसिएशनों ने कई वकीलों की मदद की है। किन्तु मुंशियों की आर्थिक सहायता देने के लिए अब तक सरकार या कोई संगठन सामने नहीं आया है जबकि हाईकोर्ट ने मुंशियों के लिए नियम तय करने का सरकार को निर्देश दिया है।