सार
न्यायालय ने श्रीकृष्ण भूमि व ईदगाह विवाद में दाखिल किए गए सभी 15 वाद को एक साथ सुनने का आदेश 11जनवरी 2024 को दिया था। सिविल वादों की पोषणीयता पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने वाद बिंदु तय करने के लिए तारीख नीयत की थी। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराते हुए रिकॉल प्रार्थनापत्र का निस्तारण करने की मांग की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले में रिकॉल आवेदन पर सुनवाई पूरी हो गई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि सभी 15 वादों में मांगी गई राहतें अलग-अलग हैं, उनकी एक साथ सुनवाई उचित नहीं है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत कर रही है। बुधवार को करीब डेढ़ घंटे चले सुनवाई के बाद रिकॉल प्रार्थना पत्र पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।
न्यायालय ने श्रीकृष्ण भूमि व ईदगाह विवाद में दाखिल किए गए सभी 15 वाद को एक साथ सुनने का आदेश 11 जनवरी 2024 को दिया था। सिविल वादों की पोषणीयता पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने वाद बिंदु तय करने के लिए तारीख नीयत की थी। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराते हुए रिकॉल प्रार्थनापत्र का निस्तारण करने की मांग की थी।इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया था।
बुधवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग से तस्नीम अहमदी ने रिकॉल प्रार्थना पत्र पर दलील दी कि जितने भी शूट दाखिल किए गए सभी की प्रार्थनाएं अलग-अलग हैैं। इनमें कोई समानता नहीं है। सभी वादों को संयुक्त करने का आदेश पोषणीय नहीं है, क्योंकि सभी पक्षकारों से सहमति नहीं ली गई है। उन्होंने कोर्ट से सभी मुकदमों को एक साथ सुने जाने के आदेश को वापस लेने की प्रार्थना की।