मस्जिद की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी ने आपत्ति की, कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी यथास्थिति आदेश को देखते हुए साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग में दाखिल याचिका पोषणीय नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की कार्बन डेटिंग सहित साइंटिफिक सर्वे कराए जाने की मांग में दाखिल याचिका पर पुरातत्व विभाग ने फिर से तीन माह का समय मांगा। कोर्ट ने 18 जनवरी तक जानकारी मांगी। इससे पहले कोर्ट ने पूछा था कि क्या बिना क्षति पहुचाये कार्बन डेटिंग की जा सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने लक्ष्मी देवी व अन्य की याचिका पर दिया है।
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मस्जिद की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी ने आपत्ति की, कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी यथास्थिति आदेश को देखते हुए साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग में दाखिल याचिका पोषणीय नहीं है। आशंका व्यक्त की है कि कार्बन डेटिंग से कथित शिवलिंग को क्षति हो सकती है और सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया है। जिसमें छेड़छाड़ नहीं कर सकते।
इससे पहले कोर्ट ने विपक्षियों को नोटिस जारी की थी। बताया गया सभी छह विपक्षियों को नोटिस सर्व कर दी गई है। याचिका पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बहस की।
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याचीगण ने जिला अदालत वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग में अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने अर्जी 14 अक्टूबर को खारिज कर दी। जिसे चुनौती दी गई है।