फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखनऊ हिंसा : कोर्ट ने पूछा, किस कानून के तहत लगवाए सार्वजनिक पोस्टर, फैसला आज

Mon, 09 Mar 2020 03:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
विज्ञापन
Allahabad High Court - फोटो : PTI
विज्ञापन

लखनऊ में सीएए के विरोध प्रदर्शन में निजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की फोटो सार्वजनिक स्थान पर लगाए जाने के मामले में रविवार को लखनऊ प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष पेश किया। हाईकोर्ट ने इसे निजता के अधिकार का हनन मानते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। 

विज्ञापन


रविवार को अवकाश होने के बावजूद मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की स्पेशल बेंच ने इस पर सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इसे सोमवार नौ मार्च को दिन में दो बजे सुनाया जाएगा। 

कोर्ट ने लखनऊ के डीएम और मंडलीय पुलिस कमिश्नर से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था कि किस कानून के तहत उन्होंने सार्वजनिक स्थान पर फोटो चस्पा किए हैं। रविवार को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने यह कहते हुए जनहित याचिका पर आपत्ति की कि लोक व निजी संपत्ति को प्रदर्शन के दौरान नुकसान पहुंचाने वालों को हतोत्साहित करने के लिए यह कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन


जिन लोगों के फोटो लगाए गए हैं वह कानून का उल्लंघन करने वाले लोग हैं। इनको पूरी जांच और प्रक्रिया अपनाने के बाद अदालत से नोटिस भी भेजा गया था। मगर कोई भी सामने नहीं आ रहा है, इसलिए सार्वजनिक स्थान पर इनके फोटो चस्पा किए गए हैं।

महाधिवक्ता का कहना था कि सरकार का कदम कानून सम्मत है और ऐसा करने में किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों मे जनहित याचिका के जरिए हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। सरकार की कार्रवाई हिंसा व तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए  है। उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए कई न्यायिक आदेशों की नजीरें भी पेश कीं। 

हालांकि कोर्ट इस बात से सहमत नहीं थी और पूछा  कि ऐसा कौन से कानून है जिससे सरकार को सार्वजनिक स्थान पर फोटो चस्पा करने का अधिकार मिल जाता है। दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फैसला सोमवार को दिन में दो बजे सुनाया जाएगा।  सरकार की तरफ से महाधिवक्ता के अलावा अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी,  मुर्तजा अली अपर शासकीय अधिवक्ता ने पक्ष रखा।

विज्ञापन

तीन बजे आए महाधिवक्ता

इससे पूर्व सुबह दस बजे सुनवाई शुरू होते ही अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने अदालत से अनुरोध किया कि महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह इस मामले में सरकार का पक्ष रखेंगे। मौसम की खराबी के कारण दिल्ली से उनकी फ्लाइट आने में विलंब है। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सुनवाई तीन बजे तक टाल दी। कोर्ट ने सार्वजनिक स्थान पर लोगों के फोटो चस्पा करने को गंभीर बात मानते हुए कहा कि आप के पास तीन बजे तक समय है यदि कुछ करना चाहते हों तो कर सकते हैं। तीन बजे  महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह आए तो मामले की सुनवाई फिर शुरु हुई।

बाहरी वकील नहीं कर पाए प्रवेश
प्रयागराज। सुबह दस बजे अदालत की सुनवाई शुरु हुई तो इसकी सूचना पाकर कई वकील अदालत आ पहुंच गए।एक अधिवक्ता ने मेंशन कर इससे जुड़े कुछ और मामलों की सुनवाई का अनुरोध किया मगर अदालत ने कहा कि वह सिर्फ इस मामले को ही सुनेंगे जिसके लिए बेंच गठित की गई है। दिन में तीन बजे सुनवाई शुरु हुई तो सरकारी वकीलों को छोड़कर अन्य को कोर्ट में प्रवेश करने से रोक दिया गया। लिहाजा काफी संख्या में वकील बाहर की सुनवाई पूरी होने का इंतजार करते रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें