मीरगंज। अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाने के बजाय एक मां ने उसे खेत में फेंक दिया। करीब तीन दिन की नवजात बच्ची तौलिये में लिपटी गन्ने के खेत में मिली। पास में दो डिस्पोजल गिलास और दूध की थैली पड़ी थी। एक ग्रामीण ने बाइक से आए दो युवक और लाल साड़ी पहनी युवती को वहां से जाते देखा। उसने पीछा भी किया, लेकिन वो लोग जा चुके थे। फिलहाल एक नि:संतान दंपती ने बच्ची को अपना लिया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की रिपोर्ट एसडीएम को भेजी जाएगी। इसके बाद ही नवजात की देखरेख और अपनाने वालों के बारे में विचार किया जाएगा।
मामला गुरुवार दोपहर बाद नेशनल हाईवे से गांव मीरनगर नौगवां जाने वाले मार्ग का है। नौगवां गांव के मोनू शर्मा ने वहां से गुजरते वक्त देखा कि एक बाइक से दो युवक और एक लाल साड़ी पहनी युवती गन्ने के खेत में एक थैली लिए खड़े हैं। आशंका होने पर वह खेत की तरफ बढ़े तो वो लोग थैली रखकर वहां से निकल गए। खेत में पहुंचने पर देखा कि वहां एक नवजात बच्ची तौलिये में लिपटी पड़ी थी और भूख से तड़प रही थी। पास में डिस्पोजल गिलास और दूध की थैली रखी थी। माजरा समझ में आने के बाद मोनू बच्ची को उठाकर तत्काल थाने पहुंच गए। यहां से एक महिला महिला पुलिस कर्मी उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची और उसका चिकित्सक से परीक्षण कराया। डॉक्टरों के अनुसार नवजात बच्ची करीब तीन दिन की है। एसएसआई बलवान सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट एसडीएम को भेजी जाएगी। वहां से जो निर्णय होगा उसी के अनुसार नवजात के बारे में निर्णय लिया जाएगा। हालांकि अभी उसकी देखरेख दंपती को दी गई है।
नवजात को देख खुशी से झूम उठे दंपती
खेत में मिली बच्ची को एक नि:संतान दंपती ने अपनाया है। दंपती का कहना है कि वह उसका पालन पोषण करेंगे। नवजात कन्या को तड़पते छोड़ने की सूचना पर गांव गुगई निवासी राजू भारती व उसकी पत्नी रचना भारती सीएचसी पहुंचीं थीं। बच्ची मिलने पर वह खुशी से झूम उठे। उन्होंने पुलिस से अपनाने की बात कही तो पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का हवाला दिया।