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स्वास्थ्य विभाग : सरकार नहीं खोज पाई लापता 25 डॉक्टरों का ''इलाज'', कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया पत्र

Thu, 04 Apr 2024 01:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जिले के दो दर्जन से अधिक चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं, इससे स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो गई है। इनके आवास पर कई बार नोटिस भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सीएमओ ने इनको बर्खास्त करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी है, ताकि पद रिक्त होने पर नई भर्ती की जा सके। 
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डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकारी अस्पतालों में तैनात 25 डॉक्टर वर्षों से लापता हैं। यह किसी थाने की रपट नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के सरकारी दस्तावेजों की बयानी है। इनका कोई अता-पता भी नहीं चल रहा। कागजों में जो पता दर्ज है, वहां भेजे गए नोटिस का कोई जवाब नहीं आया। सरकारी पदों पर कुंडली मारे बैठे ऐसे डॉक्टरों के कारण नए की भर्ती भी नहीं हो पा रही है। इस बीमार व्यवस्था का ''इलाज'' तो सरकार भी नहीं खोज पाई।

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सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को चाक-चौबंद बनाने के लाख जतन करे, डॉक्टरों के बगैर सब कसरत बेकार है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में मध्यम और गरीब तबके के लोग ही पहुंचते हैं। यह लोग जब वहां डॉक्टर को गैरहाजिर पाते हैं तो उनका भरोसा पूरे सिस्टम से टूटता है। सवाल करते हैं, भइया डॉक्टर साहब कब आएंगे...जवाब आता है कुछ नहीं पता।

वर्षों से गैरहाजिर अधिकांश डॉक्टर पीएचसी और सीएचसी में ही तैनात हैं। बताते हैं कि इनमें से कई ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन सरकार उसे स्वीकार ही नहीं कर रही। त्यागपत्र देने वालों में 2011 से अनुपस्थित चल रहे सीएचसी मेजा में तैनात डॉ. वीके चौधरी, 2017 से गैरहाजिर सीएचसी धनूपुर की डॉ. मोना त्रिपाठी व सीएचसी फूलपुर के डॉ. धनेश त्रिपाठी, 2018 से गैरहाजिर सीएचसी कौंधियारा की डॉ. प्रिया सिंह और 2017 से गैरहाजिर सीएचसी रामनगर के डॉ. रतिभान सिंह हैं।
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डॉक्टरों के ड्यूटी पर नहीं आने से मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इसी कारण मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से इन चिकित्सकाें के पते पर कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। अब सीएमओ ने कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी है।

डिप्टी सीएम ने बर्खास्त किए थे दो डॉक्टर

पिछले साल डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ऐसे ही बिना सूचना के गायब चल रहे दो चिकित्सकों को बर्खास्त किया था। जिसमें तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मिश्रा और कौड़िहार स्थित आनापुर महिला चिकित्सालय की चिकित्साधिकारी डॉ. श्रद्धा यादव है।
चिकित्सकों का है संकट

स्वास्थ्य विभाग में नियमित चिकित्सकों का अभाव काफी लंबे समय से है। हर सीएचसी में कम से कम पांच नियमित चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। स्वास्थ्य योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए पांच संविदा चिकित्सकों की भी तैनाती की जाती है। मगर, अधिकांश सीएचसी में नियमित डॉक्टर ही नहीं हैं। इससे मरीजों की कागजी भर्ती होती है। हकीकत में कोई इलाज नहीं मिल पाता।
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यह हैं गैरहाजिर चिकित्सक

रामनगर: डॉ. रतिभान सिंह, डॉ. प्रभु प्रकाश, डॉ. विजय कुमार गुप्ता।
हंडिया: डॉ. नीलू मिश्रा, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. रंकिता तिवारी

धनुपुर: डॉ. मोना तिवारी, डॉ. अविनाश जायसवाल।
शंकरगढ़: डॉ. सुमन मौर्य, डॉ. अदिति दुबे।

कौड़िहार: डॉ. श्रद्धा यादव, डॉ. ब्रजेश पटेल।
मेजा: डॉ. वीके चौधरी, डॉ. अनुराधा

मांडा: डॉ. बदरुज्जमा अंसारी, डॉ. अरविंद कुमार।
सैदाबाद: डॉ. रेखा देवी।

कौंधियारा: डॉ. प्रिया सिंह।
करछना: डॉ. विशाल रत्न श्रीवास्तव, डॉ. रवि पांडेय।

फूलपुर: डॉ. धनेश त्रिपाठी।
होलागढ़: डॉ. मरीशा।

कोटवा एट बनी: डॉ. प्रशांत कुमार त्रिपाठी।
सोरांव: डॉ. नेहा जायसवाल।

हथगहा: डॉ. शशांक पांडेय।

जिले के 25 सरकारी चिकित्सक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं। इनके घरों को कई नोटिस भी भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इन्हें बर्खास्त नहीं किए जाने के कारण नई नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। -डॉ. आशु पांडे, मुख्य चिकित्साधिकारी
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