बाजार में बिक रहे हरे, चमकदार, धारीदार तरबूजों को देखकर धोखे में मत आइयेगा। मुमकिन है कि ऐसे तरबूज आपको जिंदगी भर का दर्द दे दें। दरअसल बाजार में ऐसे तरबूजों की भरमार है जिनका आकार बढ़ाने सहित उन्हें हरा-ताजा और चमकदार बनाने के लिए ऑक्सीटोसिन, पेस्टिसाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है। कम समय में ज्यादा से ज्यादा पाने की होड़ में किसान तरबूजों का आकार बढ़ाने को खुलेआम ऑक्सीटोसिन लगाने के साथ ही कई तरह के पेस्टिसाइड का लेप भी लगा रहे हैं।
‘अमर उजाला’ से अपनी परेशानी साझा करते हुए सिविल लाइंस के सत्येंद्र कुमार ने कहा, बुधवार को बाजार से एक ताजा सा दिखने वाला तरबूज खरीदा और उसे ले जाकर घर में रख दिया। बृहस्पतिवार की सुबह जब उसे काटा तो उसमें से सफेद रंग का झाग निकलने लगा, जिसे देखकर सभी हैरत में पड़ गए। ऐसा अनुभव पहली बार रहा, इससे पहले तरबूजों से ऐसा नहीं दिखा। डॉक्टर्स का मानना है कि ऐसे फल सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं। इनके इस्तेमाल से कैंसर की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इतना ही नहीं इनके इस्तेमाल से लीवर, किडनी तक खराब हो सकती है। इन सबके अतिरिक्त भी कई तरह की छिपी बीमारियों के खतरे भी संभव हैं। ऐसे में ताजे से दिखने वाले ऐसे फलों से बचना चाहिए।
शियाट्स के कृषि वैज्ञानिक डॉ.आरपी सिंह कहते हैं, आजकल फलों को तरोताजा और हरा बनाए रखने के लिए बॉयो पेस्टिसाइड का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। गंगा के कछारी इलाकों में तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा जैसे फलों की खेती करने वाले किसान राजू कहते हैं, बाजार की प्रतिस्पर्धा में ज्यादा से ज्यादा कमाने की होड़ है सो ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करने को किसान बाध्य हैं। सीएमपी डिग्री कॉलेज के रसायनशास्त्री डॉ.संतोष कुमार भी कहते हैं, फलों को तरोताजा रखने के लिए पेस्टिसाइड का प्रयोग हो रहा है। जाहिर सी बात है, इसके साइड इफेक्ट भी हैं।
ऑक्सीटोसिन और पेस्टिसाइड सेलीवर, किडनी पर सीधे असर पड़ता है तो कैंसर की संभावना भी प्रबल होती है। और तो और इनके ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों का शारीरिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में फलों और सब्जियों की खरीदारी में सावधानी जरूरी है।
0 डॉ.मनोज माथुर
फिजीशियन, मेडिसिन विभाग
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय