इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने नए चैंबर आवंटन के लिए निर्धारित किराया और सुरक्षा राशि को अत्यधिक बताते हुए उसमें संशोधन की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर पुनर्विचार का अनुरोध किया है।
कहा कि चैंबर आवंटन योजना में प्रति आवंटी 2500 रुपये मासिक किराया और मुख्य किरायेदार से एक लाख रुपये और सह-किरायेदार से 50 हजार रुपये की सुरक्षा राशि निर्धारित की गई है। यहा राशि अधिवक्ताओं के लिए अधिक है। भवन के बिजली, रखरखाव और अन्य संचालन संबंधी खर्चों का पूरा विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, अनुमान के आधार पर इन मदों में मासिक व्यय 1.25 करोड़ से दो करोड़ रुपये के बीच हो सकता है।
अध्यक्ष राकेश पांडे व महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा ने सुझाव दिया है कि जब तक राज्य सरकार की ओर से चैंबरों के संचालन के लिए सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक सभी आवंटियों से समान रूप से 1000 रुपये प्रतिमाह किराया लिया जाए। उन्होंने दावा किया है कि 11 हजार से अधिक संभावित आवंटियों से प्राप्त होने वाली यह राशि एक करोड़ रुपये से अधिक होगी, जिससे अधिकांश खर्चों का वहन किया जा सकेगा।
यदि किराये से प्राप्त राशि से खर्च अधिक होते हैं तो अतिरिक्त व्यय का वहन हाईकोर्ट और बार एसोसिएशन समान रूप से करे। वैकल्पिक रूप से एचसीबीए को अपने अधिवक्ता निधि खाते के माध्यम से शेष धनराशि जुटाने की अनुमति दी जाए। पत्र में सुरक्षा जमा राशि को भी सभी श्रेणियों में आधा करने का अनुरोध किया गया है।
न्यायालय प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि बार एसोसिएशन का क्षेत्र जुलाई 2026 के पहले सप्ताह तक उसके सुपुर्द कर दिया जाए, ताकि कार्यालयों के स्थानांतरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा समय रहते विकसित किया जा सके। इस संबंध में एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रेस रामेश्वरदत्त पांडेय आरडी ने पत्र जारी कर जानकारी दी है।