फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्नाटक, महाराष्ट्र तक पढ़ाने जाएंगे तरावीह

विज्ञापन
ramadan
विज्ञापन
माहे मुकद्दस के इस्तेकबाल में रोजेदारों के साथ तमाम इबादतगाहें भी तैयार हैं। चांद की तस्दीक के साथ ही तरावीह शुरू होगी जबकि रोजे अगली सुबह से रखे जाएंगे। जामा मस्जिद सहित शहर की तमाम मस्जिदों में एक ओर जहां तरावीह पढ़ने वालों केलिए खास इंतजाम मुकम्मल हैं, वहीं तरावीह पढ़ाने वाले काबिल हाफिज भी तलाशे गए हैं। माहे शाबान के साथ ही उन तमाम मस्जिदों में तरावीह पढ़ाने वाले मौलवियों की तलाश शुरू हो गई थी, जहां मौलाना नहीं हैं और बाजमात नमाज नहीं होती है।
विज्ञापन


जामा मस्जिद वसीयाबाद के पेश इमाम मौलाना मुफ्ती सैफुर्रहमान के मुताबिक जामा मस्जिद वसीयाबाद में तो नई दिल्ली से हुजैफा बिन उसैद तरावीह पढ़ाने आएंगे। इसी तरह मैक टाउन मस्जिद में मिर्जापुर से कारी एजाज अहमद, डी ब्लाक करेली स्थित दारुल मआरिफ में अबकी गुजरात के स्कॉलर कारी ओसामा बिन अब्दुल्ला तरावीह पढ़ाएंगे।

शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी कहते हैं, तरावीह के लिए ऐसे हाफिज की दरकार होती है, जिन्हें कुरानशरीफ बाकायदा याद हो। ऐसे हाफिजों का हर जगह से बुलावा होता है। दारुल उलूम अफजलुल मदारिस के प्रिंसिपल मौलाना फरीद अहमद और जामिया दारुस्सलाम के कारी दीन मुहम्मद के मुताबिक तरावीह के लिए मध्यप्रदेश रीवा, सतना, कटनी, टीकमगढ़, मैहर आदि के अतिरिक्त महाराष्ट्र, कर्नाटक तक भी यहां से हाफिज भेजे गए हैं।
विज्ञापन


जामा मस्जिद चौक में 27 और पांच दिनों की तरावीह
जामा मस्जिद चौक में निचली मंजिल पर 27 दिनों की तरावीह होगी, जिसे मौलाना मोहम्मद अल्फेसानी, मौलाना सैयद रईस अख्तर और सैयद असगर अली पढ़ाएंगे। वहीं जामा मस्जिद की ऊपरी मंजिल पर पांच दिनों की तरावीह होगी, जिसे मौलाना हाफिज अजीम पढ़ाएंगे।

वहीं कंपनी बाग मस्जिद में चांद रात से तीन दिनों की तरावीह होगी जिसे मो.अंसार कानपुरी सुनाएंगे। तीसरे रमजान को रोजा इफ्तार होगा। रेजाए मुस्तफा खिदमते हुज्जाज कमेटी के सचिव शाहिद कमाल खान के मुताबिक मक्का मस्जिद करेली में पांच दिनों, मुस्तफा गार्डेन तथा गौस मस्जिद, करेली में सात दिनों और मुन्ना मस्जिद करेली में पंद्रह दिनों की तरावीह होगी।

बाजमात नमाज पढ़ाने ईरान से आए मौलाना
शिया मस्जिदों में तरावीह तो नहीं होगी लेकिन रमजान में बाजमात पांच वक्त की नमाज के लिए काबिल मौलाना चाहिए। शहर की तकरीबन दर्जन भर मस्जिदें ऐसी हैं, जहां मौलाना नहीं हैं सो वहां बाजमात नमाज भी नहीं होती है। मिर्जा गालिब रोड स्थित मदरसा अनवारुल के वाइस प्रिसिंपल मौलाना रजी हैदर कहते हैं, पढ़े होने के साथ ही मौलाना को तजुर्बेकार भी होना चाहिए। यहां मदरसे से तमाम मौलाना शहर की मस्जिदों के अलावा अंडहरा-करारी, देवरिया-हंडिया, गाजीपुर, फतेहपुर, मानिकपुर, मुस्तफाबाद आदि जगहों पर नमाज पढ़ाएंगे। वहीं यहीं के पढ़े मौलाना यासिर गाजीपुर और मौलाना जरगाम हैदर मानिकपुर में नमाज पढ़ाने के लिए ईरान से आए हैं।
विज्ञापन



कहां, कितने दिनों की तरावीह
-जामा मस्जिद वसीयाबाद/27 दिन
-दरगाह मुनव्वर शाह बाबा/तीन दिन
-सिराजुल मदीना, बैरियर/सात दिन
-मस्जिद नवाब युसूफ रोडवेज/सात दिन
-जामिया हबीबिया, मीरापुर/सात दिन
-स्टेशन वाली मस्जिद/सात दिन
-बड़ी मस्जिद रसूलपुर/दस दिन
-मस्जिदे हबीब टूटी मस्जिद/11 दिन
 -कर्नलगंज मस्जिद/21 दिन
-निराला मस्जिद, नूरुल्लाह रोड/21 दिन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें