पिचकारी, अबीर-गुलाल की चमक से बाजार देर रात तक गुलजार रहा। वहीं घरों और मिष्ठान की दुकानों पर पारंपरिक पकवानों की खुशबू भी घुलने लगी है। इस बार होली के पारंपरिक व्यंजन गुझिया में नवाचार देखने को मिला, जो पारंपरिक मिष्ठान भंडार के साथ कन्फेक्शनरी की दुकानों पर नजर आ रही हैं।
होली की हुड़दंग में सेहत अक्सर पीछे छूट जाती है, लेकिन इस बार व्यापारियों ने नवाचार के जरिए हर वर्ग के ग्राहकों को लुभाने का प्रयास किया है। कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए बेकरी विशेषज्ञों ने खास आग में सेंकी गई गुझिया तैयार की है। शुगर से पीड़ित लोगों के लिए मिष्ठान विक्रेताओं ने मधुमेहरोधी पाउडर व शुगर-फ्री विकल्पों का उपयोग कर गुझिया बनाई है।
ग्राहक अब खोया के साथ काजू, बादाम और पिस्ता आदि के मिश्रण से तैयार गुझिया को अधिक पसंद कर रहे हैं। घरों में भी महिलाओं ने पारंपरिक पकवान बनाने लगी हैं। सोमवार को देर शाम तक अबीर-गुलाल व पिचकारी की दुकानों पर भीड़ रही।
- हमने परंपरा को आधुनिकता से जोड़ने का प्रयास किया है। लोग अब स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक हैं। इसलिए साधारण गुझिया के साथ बेक्ड गुझिया भी बाजार में उपलब्ध है। - अनुराग जायसवाल, दुकानदार
- शुगर पीड़ितों के लिए होली फीकी न रहे, इसके लिए विशेष मधुमेहरोधी पाउडर और स्टीविया आधारित गुझिया तैयार की है। इसके साथ ही ड्राई फ्रूट्स की अलग-अलग वैरायटी की ब्रांडिंग की जा रही है। - मनोज केसावानी, व्यापारी
- होली पर पकवानों में नवाचार ही बाजार की मांग है। हम पारंपरिक खोया गुझिया के साथ चॉकलेट, केसरिया गुझिया भी बना रहे हैं। साफ-सफाई और शुद्ध मेवों का उपयोग हमारी प्राथमिकता है।- विक्की मोदनवाल, मिष्ठान दुकानदार।
लालगोपालगंज - अनुराग जायसवाल
लालगोपालगंज - अनुराग जायसवाल
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